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अखिल भारतवर्षीय श्री खाण्डल विप्र महासभा

भारद्वाज आश्रम, पुष्कर राजस्थान

पंजीयन संख्या : A-8340/29.10.1952

हमारे बारे में

विप्र समाज की एकता और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षक

संस्था का परिचय, इतिहास और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए उसका स्थायी दृष्टिकोण।

विक्रम संवत की बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में खाण्डल विप्र जाति के महान लोगों ने जातीय पुनरुत्थान का अभियान शुरू किया। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अखिल भारतवर्षीय श्री खाण्डल विप्र महासभा की स्थापना की गई।

राजवैद्य पं. श्री रामजीलाल जी माटोलिया (कोटकपुरा निवासी) की प्रेरणा और सहयोग से, सासनी (अलीगढ़) निवासी रूथला बंधुओं तथा अन्य विद्वानों के सहयोग से यह कार्य हुआ। वैद्यराज पं. द्वारिका प्रसाद जी के विवाह के अवसर पर, वैशाख कृष्ण द्वितीया विक्रम संवत 1965 (1908 ई.) को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस महासभा की स्थापना की गई।

इस स्थापना में पं. श्री दुर्गादत्त जी विद्यारत्न (वृन्दावन) का भी विशेष योगदान रहा। स्थापना के दिन ही महासभा का पहला अधिवेशन श्री लक्ष्मणाचार्य जी शास्त्री की अध्यक्षता में मथुरा में सम्पन्न हुआ।

महासभा के माध्यम से खाण्डल विप्र समाज को अज्ञानता और कुरीतियों से बाहर निकालकर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाया गया। आज यह समाज एक विकसित ब्राह्मण समाज के रूप में आगे बढ़ रहा है और महासभा के 100 वर्षों के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है।

महासभा की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य

अखिल भारतवर्षीय श्री खाण्डल विप्र महासभा की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में फैली खाण्डल विप्र जाति का विकास करना और समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करना है।

इसके लिए निम्न कार्य किए गए:

  • समाज में शिक्षा का व्यापक प्रसार करना
  • विभिन्न क्षेत्रों में महासभा की शाखाएं स्थापित करना
  • अधिक आबादी वाले शहरों में विद्यालय और छात्रावास खोलना
  • विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देना
  • शिक्षण फंड ट्रस्ट और जनकल्याण ट्रस्ट की स्थापना करना
  • समाज के विकास और कल्याण के लिए कार्य करना

आज भी महासभा अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और बदलते सामाजिक व राजनीतिक वातावरण में समाज को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

महासभा परिचय

वर्तमान महासभा अध्यक्ष

मोहनलाल बोचीवाल

दृष्टिकोण

हमारे मुख्य उद्देश्य

समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और भविष्य के प्रति हमारा दृष्टिकोण इन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।

शिक्षा का प्रसार

समाज में शिक्षा का व्यापक प्रसार करना।

शाखाओं की स्थापना

विभिन्न क्षेत्रों में महासभा की शाखाएं स्थापित करना।

विद्यालय और छात्रावास

अधिक आबादी वाले शहरों में विद्यालय और छात्रावास खोलना।

छात्रवृत्ति सहायता

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देना।

ट्रस्ट की स्थापना

शिक्षण फंड ट्रस्ट और जनकल्याण ट्रस्ट की स्थापना करना।

समाज कल्याण

समाज के विकास और कल्याण के लिए कार्य करना।